आज फिर माँ का आंचल याद आता है
मेरा बचपन मेरा गाँव,अक्सर मुझे बुलाता है ।
धूल भरी सडकों में,बस के पीछे भागना
धूल धूसरित देख,माँ का हमको डांटना ।
फिर प्यार से गले लगाना कब,भूल पाता है
मेरा बचपन मेरा गाँव अक्सर मुझे बुलाता है
वो रामलीला वो सिनेमा दिखाने वाले
गाँव के superstar हंसाने रुलाने वाले
बलदेव जीजा सन्तोष भाई,
हर चेहरा कहीं खो जाता है
मेरा बचपन मेरा गाँव अक्सर मुझे बुलाता है।
चार दुकानों का,बाजार बड़ा लगता था
हर कोई बहुत, अपना सा लगता था
वो सादा सा प्रेम अपनापन
कहाँ भूल पाता है
मेरा बचपन मेरा गाँव अक्सर मुझे बुलाता है ।
दो महीने की छुट्टी में,दादी के घर जाना
बारिश में मुहल्ले भर में,दौड लगाना
वो लाड़ वो लाड़ी ,वो बाजार वो कराड़ी
दिल बार बार वहीं चला जाता है
मेरा बचपन मेरा गांव अक्सर मुझे बुलाता है
हर मर्ज का इलाज माँ के पास था
डैडी के कन्धा,अपना अन्तरिक्ष वाला जहाज था
दादा को सबको जय भगवान कहना रुला ही जाता है
मेरा बचपन मेरा गाँव अक्सर मुझे बुलाता है
। अचलाएसगुलेरिया
Wednesday, June 3, 2020
प्यारा धौलाधार
प्यारा धौलाधार न्यारा धौलाधार
हमारा धौलाधार
चित्र भी विचित्र,चित्रकार भी बड़ा है ।
उन्नत शिखर किये,सदियों से खड़ा है ।
हर ऋतु है लाये,तुझपे नयी बहार..
प्यारा धौलाधार..✍
बर्फ तेरा मुकुट बन,श्रंगार है करे ।
तेरे उकेरे चित्र में, रँग है भरे ।
शिवालिक तेरा दीवाना,तुझे रहा निहार..
प्यारा धौलाधार.
जब भी दूर जायें ,तू देखता है दूर तक ।
हम भी तुझको देखते हैं,बार बार पलट पलट ।
पिता का दे आभास,तू यूँ रहा निहार..
प्यारा धौलाधार..
आऊँ जब मैं दूर से ,उदास सा थका थका ।
दूर से दिखे खड़ा, बुलाता अपने पास सा ।
जैसे कोई बड़ा,लेने आये द्वार..
प्यारा धौलाधार...
निसर्ग की कल्पना,साकार है तू ।
बसुन्धरा का रजत,कंठ हार है तू ।
हरी भरी ये घाटियाँ,करें तेरा श्रंगार..
प्यारा धौलाधार.. अचला एस गुलेरिया
हमारा धौलाधार
चित्र भी विचित्र,चित्रकार भी बड़ा है ।
उन्नत शिखर किये,सदियों से खड़ा है ।
हर ऋतु है लाये,तुझपे नयी बहार..
प्यारा धौलाधार..✍
बर्फ तेरा मुकुट बन,श्रंगार है करे ।
तेरे उकेरे चित्र में, रँग है भरे ।
शिवालिक तेरा दीवाना,तुझे रहा निहार..
प्यारा धौलाधार.
जब भी दूर जायें ,तू देखता है दूर तक ।
हम भी तुझको देखते हैं,बार बार पलट पलट ।
पिता का दे आभास,तू यूँ रहा निहार..
प्यारा धौलाधार..
आऊँ जब मैं दूर से ,उदास सा थका थका ।
दूर से दिखे खड़ा, बुलाता अपने पास सा ।
जैसे कोई बड़ा,लेने आये द्वार..
प्यारा धौलाधार...
निसर्ग की कल्पना,साकार है तू ।
बसुन्धरा का रजत,कंठ हार है तू ।
हरी भरी ये घाटियाँ,करें तेरा श्रंगार..
प्यारा धौलाधार.. अचला एस गुलेरिया
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